अधिगम प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले कारक


अधिगम एक व्यापक क्रिया है इसके द्वारा बालक के व्यवहार और दृष्टिकोण दोनों में ही परिमार्जन होता है। इस प्रक्रिया की सफलता केवल प्रभावशाली शिक्षण पर ही नहीं वरन् अनेक सामूहिक कारकों पर निर्भर करती है। शिक्षक, शिक्षार्थी, पाठ-वस्तु, अधिगम व्यवस्था, वातावरण इत्यादि से सम्बन्धित अनेक कारक अधिगम के स्वरूप व गति के निर्धारक के रूप में उत्तरदायी होते है। इसके कारक इस प्रकार से है-
  • शिक्षार्थी से सम्बंधित कारक
  • शिक्षक से सम्बंधित कारक
  • विषय से सम्बंधित कारक
  • अधिगम व्यवस्था से सम्बंधित कारक
  • वातावरण से सम्बंधित कारक
शिक्षार्थी से सम्बन्धित कारक-
किसी भी क्रिया को सीखने का केन्द्र बिन्दु शिक्षार्थी होता है। शिक्षार्थी का सर्वांगीण विकास करना ही शिक्षा का उद्देश्य है। इस दृष्टिकोण से बालकों की रुचि योग्यता, क्षमता, अभिरुचि अभिवृत्ति व्यक्तिगत भेद, बुद्धि के आधारपर सम्पन्न की गई किया प्रभावशाली सिद्ध हो सकती है। शिक्षार्थी शिक्षण अधिगम क्रिया का आधार है। ऐसी स्थिति में अधिगम क्रिया अनेक कारकों से प्रभावित होती है जो निम्नवत् है-
  1. अभिप्रेरणा - अधिगम का प्रथावक्र कारक प्रेरणा है। अभिप्रेरणा अधिगम का मनोवैज्ञानिक कारक है जिसके माध्यम से अध्यापक बालक को अधिगम की ओर उन्मुख करता है। यदि बालकों को बड़ा बनने के लिए अभिप्रेस्ति किया जाता है तो वह अधिगम हेतु तत्पर होकर सिखने में रुचि लेगा क्योंकि अभिप्रेरणा से सीखने की इच्छा प्रबल हो जाती है व अभिप्रेरणा उत्पन्न करने के लिए यह आवश्यक है कि बालक को उसका लक्ष्य स्पष्ट का दिया जावे।
  2. सीखने की इच्छा - बालकों को नया ज्ञान देने से पूर्व यह परम आवश्यक है कि उनमें सीखने के अति जिज्ञासा उत्पन्न की जाये क्योकिं ऐसा करने से विद्यार्थी प्रतिकूल परिस्थितियों में भी किसी बात को सीखने में सफल हो जाता है। अधिगम सीखने वाले की इच्छा शक्ति पर निर्भर करता है। जन्मजात शक्तियों तथा सामाजिक परिस्थितियों के बावजूद बालक अपनी इच्छा शक्ति से कुछ सीख सकता है। सीखने की इच्छा के अतिरिक्त छात्रों का आकांक्षा स्तर भी उच्च कोटि का होना चाहिए जिससे छात्र कठिन तथ्यों को भी आसानी से सिख सके।
  3. शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य - प्रभावशाली अधिगम क्रिया हेतु छात्रों का शारीरिक व मानसिक दृष्टिकोण से स्वस्थ होना अनिवार्य है। शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ बालक कक्षा-कक्ष में अधिगम प्रक्रिया को दक्षता से ग्रहण का लेते है । बालक के ध्यान, रुचि व एकाग्रता पर शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य का प्रभाव पड़ता है। इसके विपरीत किसी भी प्रकार की मानसिक विकृति है जो शारीरिक रुग्णता, तनाव का प्रत्यक्ष प्रभाव बालकों की अधिगम प्रक्रिया पर प्रतिकूल पड़ता है। वे शीघ्र थक जाते है तथा सीखने की गति मंद हो जाती है।
  4. परिपक्वता - अधिगम क्रिया को प्रभावित करने वाले कारकों में परिपक्वता को भी मुख्य कारक माना गया है। प्रत्येक कार्य को सीखने के लिए बालकों में शारीरिक व मानसिक परिपक्वता आवश्यक होती है क्योंकि बालक की शारीरिक व मानसिक परिपक्वता ही अधिगम प्रक्रिया क्रो अधिक प्रभावी बनाती है। लिखना व पढ़ना सिखने से पूर्व बालक की क्षमता का ध्यान रखना अनिवार्य है। परिपक्वता के अभाव में बालक शीघ्रतापूर्वक सीख नहीं सकता। अधिगम व परिपक्वता यह दोनो एक-दूसरे के पूरक है।

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