स्मियरमैन का सिद्धान्त

  • समतात्विक सिद्धांत- इस सिद्धान्त का प्रतिपादन थार्नडाइक ने किया। उसके अनुसार एक विषय का अध्ययन दूसरे विषय के अध्ययन से तभी सहायक सिद्ध होता है जब कि इन दोनों विषयों में कुछ तत्व समान हों। दोनों विषयों में जितनी अधिक समानता होगी स्थानान्तरण भी उतना ही अधिक होगा।
यह समानता-प्रक्रिया, विषय सामग्री विचार ध्यान, सिद्धान्त, उदेश्य, चिन्तन आदि की इकाई में हो सकती है। उदाहरण के लिए साइकिल और मोटर साइकिल की चलने की प्रक्रिया में समान तत्त्व विद्यमान है। अत: साइकिल चलाने वाला मोटर साइकिल चलाना जल्दी सीख जाता है।
थार्नडाइक ने दो स्थितियों में अंतरण का कारण एक ही तंत्रिका तंत्र को बताया है।  उनका विचार है कि प्रत्येक कार्य के छोटे-छोटे भाग होते है। इन छोटै-छोटे भागो में जितनी अधिक समानता होगी, उतना ही अधिक अंतरण होगा।
सोरेन्सन ने थार्नडाइक्त के मन की पुष्टि की है और इसकी व्याख्या इस ढंग से प्रस्तुत की है "समरूप तत्व सिद्धातों के अनुसार, एक परिस्थिति से दूसरी परिस्थिति में उस सीमा तक अंतरण हो जाता है जबकि दोनों ही समान होते है।"
अग्लोचनचिंस के सिद्धान्त की आलोचना सर्वप्रथम जेम्स ने की। वुडवर्थ ने भी इस सिद्धान्त में 'तत्त्व' शब्द को भ्रामक बताया तथा इसके स्थान पर 'घटक' शब्द का प्रयोग किया।
थार्नडाइक के मतानुसार यदि यह मान लिया जाये कि अवधान आदि सब मस्तिष्क के विभिन्न तत्त्व है और इन्हीं को सामान रूप में लिया जावे तो यह शायद समान तत्व नहीं होगा क्योकि अवमान या स्मृति का सम्बन्ध किसी विषय विशेष से न होकर सभी विषयों है है । अत: यहाँ समान तत्वों का आशय किसी क्रिया से सम्बन्धित तत्वों से ही होना चाहिए।
  • स्मियरमैन का द्वितात्विक सिद्धान्त- इस सिद्धान्त के प्रतिपादक स्मियरमैन थे। उन्होंने बुद्धि संप्रत्यय का अध्ययन किया था और यह बताया था कि बुद्धि दो प्रकार की होती है "सामान्य तथा विशिष्ट। सामान्य रूप से जीवन के प्रत्येक क्रिया-कलाप में सामान्य बुद्धि ही प्रयुक्त होती है। जहॉ तक विशिष्ट बुद्धि का प्रश्न है वह प्रत्येक: मनुष्य में भिन्न होती है। स्पीयरवैन ने यह स्पष्ट किया कि अधिगम अंतरण विशिष्ट योग्यता में न होकर सामान्य योग्यता में होता है। सामान्य बुद्धि ही अंतरण का आधार है। गणित, विज्ञान, भाषा, सामाजिक विषय प्राय: सामान्य योग्यता में वृद्धि करते है जबकि संगीत, कला जादि से विशिष्ट योग्यता का विकास होता है। सामान्य योग्यता का समावेश प्राय: सभी कार्यों में थोडा बहुत रहता है। अत: स्पीयरमैन के अनुसार छात्रों को अधिक से अधिक उन्हें विषयों का अध्ययन करना चाहिए जिनमें बुद्धि के सामान्य तत्त्व की आवश्यकता पडती हो, क्योंकि ऐसे ही विषयों का ज्ञान जीवन के अन्य क्षेत्रों में स्थानांतरित होता है।
  • आलोचना- स्मियरमैन का सिद्धान्त अधिक स्पष्ट नहीं है। इससे तो केवल यह पता चलता है कि सीखने की किन दशाओं में अंतरण की सम्भावना हो सकती है। इससे यह स्पष्ट नहीं होता कि अंतरण की मात्रा कितनी होगी।
  • सामान्यीकरण का सिद्धांत- स्तनांतरण के इस सिद्धान्त के प्रतिपादक एच.जेड है । उनके अनुसार जब कोई व्यक्ति अपने किसी कार्य,ज्ञान या अनुभव से कोई सामान्य नियम या सिद्धान्त निकाल लेता है तो वह दूसरी परिस्थिति में उसका प्रयोग आसानी से कर सकता है।

Comments

Popular posts from this blog

अधिगम- अंतरण का अर्थ

अधिगम प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले कारक

मूल्यों के अभिज्ञान का सिद्धान्त