Posts

Showing posts from November, 2019

मूल्यों के अभिज्ञान का सिद्धान्त

Image
इस सिद्धान्त के अनुसार सूक्ष्म दृष्टि तथा सूझ-बूझ की भूमिका अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है क्योंकि जब किसी व्यक्ति में दोनों प्रकार की परिस्थितियों की प्रक्रिया, उद्देश्य, एक विषय-वस्तु का सम्यक ज्ञान सामान्य रूप से सहज हो जायेगा तभी एक परिस्थिति का ज्ञान दूसरी परिस्थिति में स्थानान्तरित हो सकेगा। अत: इस सिद्धांत की उपलब्धि हेतु उच्च क्रोटि की बौद्धिक क्षमता के सक्रिय प्रक्रिया की आवशयकता पड़ती है। इस प्रकार से बुद्धि की उच्च मात्रा तथा समायोजनशीलता का उत्कृष्ट गुण ही मिलने पर किसी विषय के ज्ञान को सहज बनाने में सहायक होते है और यही सहजता ही समयिकरण है।
क्रो एव क्रो ने अपना मत इस प्रकार से प्रगट किया है- विशिष्ट निपुणता या विशेष आदत या मनोवृति का प्राप्य दूसरी स्थिति में स्थानान्तरण से बहुत महत्त्व रखता है। यह स्थिति उस समय तक चलती है जब तक निपुणता, तथ्य, स्वभाव क्रम बद्ध नहीं हो जाते।
आलोचना- यह तो सही है कि जब दो बातों में समानता होती है तो दूसरी बात भी आसानी से "समझ में आ जाती है लेकिन यदि समान तत्व सिद्धान्त में समानता का अर्थ वस्तु या समान तत्वों से लगाया जाता है तो यह सिद्धान्त भी …

स्मियरमैन का सिद्धान्त

Image
समतात्विक सिद्धांत- इस सिद्धान्त का प्रतिपादन थार्नडाइक ने किया। उसके अनुसार एक विषय का अध्ययन दूसरे विषय के अध्ययन से तभी सहायक सिद्ध होता है जब कि इन दोनों विषयों में कुछ तत्व समान हों। दोनों विषयों में जितनी अधिक समानता होगी स्थानान्तरण भी उतना ही अधिक होगा। यह समानता-प्रक्रिया, विषय सामग्री विचार ध्यान, सिद्धान्त, उदेश्य, चिन्तन आदि की इकाई में हो सकती है। उदाहरण के लिए साइकिल और मोटर साइकिल की चलने की प्रक्रिया में समान तत्त्व विद्यमान है। अत: साइकिल चलाने वाला मोटर साइकिल चलाना जल्दी सीख जाता है।
थार्नडाइक ने दो स्थितियों में अंतरण का कारण एक ही तंत्रिका तंत्र को बताया है।  उनका विचार है कि प्रत्येक कार्य के छोटे-छोटे भाग होते है। इन छोटै-छोटे भागो में जितनी अधिक समानता होगी, उतना ही अधिक अंतरण होगा।
सोरेन्सन ने थार्नडाइक्त के मन की पुष्टि की है और इसकी व्याख्या इस ढंग से प्रस्तुत की है "समरूप तत्व सिद्धातों के अनुसार, एक परिस्थिति से दूसरी परिस्थिति में उस सीमा तक अंतरण हो जाता है जबकि दोनों ही समान होते है।"
अग्लोचनचिंस के सिद्धान्त की आलोचना सर्वप्रथम जेम्स ने की। व…

सामाजिक समायोजन से सम्बन्धित समस्या

Image
ज्यों-ज्यों बालक बड़ा होता जाता है, ज्यों-ज्यों भयों की संख्या और तीव्रता घटती जाती है। ज़रसिल्ड के अनुसार बालक का अपरिचित पर्यावणों व अनुभवों से जब भली भांति परिचित हो जाता तब उनके प्रति भय मिट जाता है।
उम्र के साथ-साथ डर तो घटते जाते है, लेकिन काल्पनिक, अलौकिक या दूरस्थ खतरों, अंधेरे व अंधेरे में रहने वाली काल्पनिक चीजों के तथा शव और मृत्यु से सम्बन्धित चीजों के डर बढ़ जाते है। हरलाक के अनुसार उत्तर बाल्यावस्था में बड़े बालक बदल जाने, उपहास का पात्र बनने या चिढाये जाने और हाथ में लिये काम में असफ़ल होने से भी डरते है। क्योंकि बड़ा बालक जानता है कि उसका भय प्रकट करने वाली परिस्थिति से वह बचने की केशिश करता है ताकि भयग्रस्त होने की हालत में दिखाई देने की अपमानजनक स्थिति में वह अपने आप को बचा सके। जरसिल्ड के अनुसार शर्म, जो कि सामाजिक परिस्थितियों में होने वाले भय का एक रूप है, प्राय: इस तरह के अधीरता सूचक व्यवहार में प्रकट होती है जैसे नाक कान या कपड़े को खींचते रहना, या कभी एक पाँव पर कमी दूसरे पाँव पर टिके रहना। विद्यालय में बालक गुह कार्य, परीक्षा पारिवारिक समस्याओं ,व्यक्तिगत और सामाज…

शून्य अंतरण

Image
जब पहले सीखे गये कौशल का प्रभाव वर्तमान कौशल के सीखने पर न तो धनात्मक होता है और न ही ऋणात्मक, तो इसे शून्य अंतरण कहा जाता है। दूसरे शब्दों में कह सकते है जब एक क्षेत्र का ज्ञान दूसरे क्षेत्र के ज्ञान को न तो सहायता पहुँचाता है और न बाधा, तब हम उसे शून्य अंतरण कहते है।
अंतरण के कुछ विशिष्ट प्रकार-
मनोवैज्ञानिको ने अंतरण के कुछ विशिष्ट प्रकारों का भी वर्णन किया है जिनमें प्रमुख निम्नवत् है।
पार्श्वीय अंतरण- पार्श्वीय अंतरण एक ऐसा अंतरण है जिसमें सीखे गये कौशल का अंतरण एक ऐसी परिस्थिति या ऐसे विषय की अधिगम प्रक्रिया में निहित होता जो उसी स्तर का होता है। उदाहरण के लिए किसी छोटे बालक को सिखाया जाता है कि 9-3=6 है तो वह घर पर आकर 9 केलों में 3 केले ले लेने पर यह समझता है कि अब 6 केले ही शेष रहे होंगे, इस उदाहरण से हम पार्श्वीय अंतरण को भली प्रकार समझ सकते है।
द्विपार्श्वीय अंतरण- मनुष्य के शरीर के दो समान पार्श्वीय भाग बायाँ तथा दायाँ। जब शरीर के बाएं अंग से सीखे गये कौशल का अंतरण स्वतः दाएं अंग के सीखने पर या दाएँ अंग से सीखे गये कौशल का अंतरण बाएं से सीखने पर होता है तो उसे द्विपार्श्व…

अधिगम प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले कारक

Image
अधिगम एक व्यापक क्रिया है इसके द्वारा बालक के व्यवहार और दृष्टिकोण दोनों में ही परिमार्जन होता है। इस प्रक्रिया की सफलता केवल प्रभावशाली शिक्षण पर ही नहीं वरन् अनेक सामूहिक कारकों पर निर्भर करती है। शिक्षक, शिक्षार्थी, पाठ-वस्तु, अधिगम व्यवस्था, वातावरण इत्यादि से सम्बन्धित अनेक कारक अधिगम के स्वरूप व गति के निर्धारक के रूप में उत्तरदायी होते है। इसके कारक इस प्रकार से है-
शिक्षार्थी से सम्बंधित कारकशिक्षक से सम्बंधित कारकविषय से सम्बंधित कारकअधिगम व्यवस्था से सम्बंधित कारकवातावरण से सम्बंधित कारकशिक्षार्थी से सम्बन्धित कारक-
किसी भी क्रिया को सीखने का केन्द्र बिन्दु शिक्षार्थी होता है। शिक्षार्थी का सर्वांगीण विकास करना ही शिक्षा का उद्देश्य है। इस दृष्टिकोण से बालकों की रुचि योग्यता, क्षमता, अभिरुचि अभिवृत्ति व्यक्तिगत भेद, बुद्धि के आधारपर सम्पन्न की गई किया प्रभावशाली सिद्ध हो सकती है। शिक्षार्थी शिक्षण अधिगम क्रिया का आधार है। ऐसी स्थिति में अधिगम क्रिया अनेक कारकों से प्रभावित होती है जो निम्नवत् है-
अभिप्रेरणा - अधिगम का प्रथावक्र कारक प्रेरणा है। अभिप्रेरणा अधिगम का मनोवैज्ञानि…

अधिगम- अंतरण का अर्थ

Image
विटेकर ने अधिगम-अंतरण को इस प्रकार से परिभाषित किया है- प्रशिक्षण के अंतरण से तात्पर्य किसी एक कौशल या विषय वस्तु के सीखने का किसी दूसरे कौशल या विषय वस्तु के सीखने पर पड़ने वाले प्रभाव है होता है।
अधिगम- अंतरण का अर्थ वर्तमान किया पर पूर्व अनुभवों का प्रमाद होता है, अधिगम स्थानान्तरण में एक क्रिया का प्रभाव दूसरी क्रिया पर पड़ता है।
कॉलसनिक्रच्चा अधिगम- अंतरण पहली परिस्थिति से प्राप्त, ज्ञान, कौशल, आदत, अमियोग्यता का दूसरी परिस्थिति में प्रयोग करना है।
गुधरी एवं पखर्स- "अधिगम- अंतरण से अभिप्राय व्यवहार के विस्तार तथा विनियोग से है।
क्रो एवं क्रो -अधिगम के एक क्षेत्र में प्राप्त ज्ञान, अनुभव, विचार, आदत या कौशल का दूसरी परिस्थिति में प्रयोग किया जाता है तो वह अधिगम-स्थानान्तरण कहलाता है।
जिया सोरेन्सन- "स्थानान्तरण एक परिस्थिति में अर्जित ज्ञान, प्रशिक्षण एवं आदतों का दूसरी परिस्थिति में अन्तरण होना है।
पेटासन- यह एक नये क्षेत्र तक विचारों का विस्तार है।
मन- "एक कौशल क्षमता का अधिगम जब दूसरे कौशल क्षमता के अविधगम की उपलब्धि है यह प्रतीत होता है तब हम उसे अभिगम का स्थानान्…