सक्रिय तथा निश्चिय विधि

विद्यार्थी पाठ्य वस्तु को दो विधियों से याद करता है। प्रथम सक्रिय विधि द्वितीय निक्रिय विधि। सक्रिय विधि के अन्तर्गत विद्यार्थी विषयवस्तु को जोर-जोर से या धीमे-धीमे बोल-बोल कर कंठस्थ करने का प्रयास करता है जबकि निक्रिय विधि के अन्तर्गत विद्यार्थी पाठ्य वस्तु को मन ही मन पढकर कंठस्थ करने का प्रयास करते है। गेट्स, एबिगहाप्त एवं उनके साथियों की दृष्टि से सक्रिय विधि, निक्रिय विधि की तुलना में कहीं अधिक उपयोगी है। किसी नवीन पाट्यवस्तु या नवीन विषय को सीखने में निक्रिय विधि, अक्रिय विधि की तुलना में कहीं अधिक श्रेष्ठ है। वैसे यह दोनों विधियाँ अपने आप में महत्वपूर्ण है और विद्यार्थी अपनी अभिवृत्ति के अनुरूप नवीन ज्ञान को सीखने में इनमें से किसी एक का चयन करता है।
वातावरण से संबन्धित कारक- बालक की अधिगम प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले वातावरण से सम्बन्धित कुछ मुख्य कारक इस प्रकार से है-
  • वातावरण का प्रभाव- वंशानुक्रम से बालक केवल अपने पूर्वजों के गुणों को ही प्राप्त करता है लेकिन उन गुणों का समुचित विकास वातावरण द्वारा ही होता है। यदि वातावरण उचित नही है तो उसके गुणों का विकास भी ठीक प्रकार से नहीं होगा। वातावरण एक बाह्य शक्ति है जो बालक के विकास के सभी पक्षों को प्रभावित करती है। वातावरण बालक की जन्मजात शक्तियों को निर्देशित तथा प्रोत्साहित करता है। वातावरण ही बालक के व्यवहार का निर्धारण का उसमें अधिगम क्षमता का उत्तम विकास करती है।
  • व्यक्तित्व का विकास- व्यक्तित्व वंशानुक्रम वातावरण का गुणनफल होता है। वंशानुक्रम तथा वातावरण के ज्ञान से व्यक्ति मानवीय मुनियों के विकास में रुचि लेने लगता है तथा दोनों की क्रिया के माध्यम से व्यक्तित्व का विकास होता है। बालक बाह्य वातावरण से ही अभिप्रेरणा, चरित्र, बौद्धिक क्षमताओं, रुचियाँ, अभिवृतियों आदि का विकास कर अपने व्यक्तित्व को प्रभावी बनाने का प्रयास करता है। इन सब गुणों का प्रभाव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उसकी अधिगम प्रक्रिया पर भी पड़ता है।
  • परिवार का वातावरण- बालक की अधिगम प्रक्रिया पर उसके परिवार के वातावरण का काकी प्रभाव पड़ता है। परिवार बालक की प्रथम पाठशाला है। इस पाठशाला का प्रभाव बालक पर जीवनपर्यन्त रहता है। परिवार के सदस्यों के मध्य सम्बन्ध, उनकी शिक्षा, उनकी सामाजिक व आर्थिक स्थिति, परिवार से प्राप्त स्नेह एवं सुरक्षा की भावना आदि समस्त बातें बालक की अधिगम प्रक्रिया को प्रभावित करती है। परिवार का अच्छा वातावरण बालक को निरन्तर आगे बढने के लिए प्रोत्साहित करता रहता है।
  • कक्षा का भौतिक वातावरण- कक्षा का भौतिक वातावरण छात्रों के अधिगम को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। भौतिक वातावरण के अन्तर्गत प्रकाश, वायु, कोलाहल आदि आते है। इस प्रकार भौतिक वातावरण के अन्तर्गत उन सुख सुविधाओं को भी लिया जाता है जो किसी कक्षा में होने चाहिए। यदि कक्षा-कक्ष में छात्रों के बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं है। कमरों में अंधेरा है, रौशनी तथा हवा का प्रबंध नहीं है, फर्नीचर टूटा हुआ है। कहीं विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए उपकरण नहीं, प्रयोगशालाएं व्यवस्थित नहीं है तो ऐसा वातावरण बालक की अधिगम प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है जिससे वह कक्षा-कक्ष में नीरसता व थकान का अनुभव करने लगता है तथा इन विषम परिस्थितियों से बालक की सिखने की क्रिया में बढ़ा उत्पन्न हो जाती है।
  • मनौवैज्ञानिक वातावरण- कक्षा का मनोवैज्ञानिक वातावरण भी छात्रों के सीखने की प्रक्रिया को पर्याप्त सीमा तक प्रभावित करता है। यदि छात्रों में एक-दूसरे के प्रति सहयोग और सहानुभूति की भावना पैदा करता है।

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