पाठ्यवस्तु से सम्बंधित कारक

अधिगम प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले पाट्यवस्तु से सम्बंधित कुछ मुख्य कारक इस प्रकार है-
  • विषय-वस्तु की प्रकृति - विषय-वस्तु की प्रवृति अधिगम-प्रक्रिया को पुर्ण रूप से प्रभावित करती है। यदि विषयवस्तु सरल हो तो सामान्य छात्र भी उसका मतलब सीख लेते है। यदि विषय-वस्तु कठिन है तो छात्रों के सीखने में कठिनाई का अनुभव होता है। साथ ही कठिन विषय-वस्तु को याद करने में भी अधिक समय लगता है, इसके अतिरिक्त गद्य, पद्य, गणित एवं विज्ञान की प्रकृति भिन्न होने के कारण भी अधिगम प्रक्रिया प्रभावी होती है। विषय-वस्तु का चयन बालकों के मानसिक स्तर के अनुरूप करना चाहिए।
  • विषय-वस्तु का आकार-  विषय-वस्तु का आकार व मानक भी दृश्यों की अधिगम प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है । छात्र उन पाठों का अध्ययन पहले करते है जो छोटे होते है तथा विषयवस्तु कम होती है । वह लम्बे-लम्बे पाठों से बचना चाहता है। यदि विषय-वस्तु का आकार विस्तृत है तो बालक उन पाठों की तैयारी मन लगा कर नहीं करता तथा विस्तृत विषय-वस्तु से वह शीघ्र थक जाता है और नीरसता का अनुभव करता है।
  • विषय-वस्तु का क्रम - प्रत्येक्र विषय-वस्तु का कठिनाई स्तर अलग-अलग होता है। इसलिए विषय-वस्तु को छात्रों के समक्ष प्रस्तुत करने का क्रम भी उनके सीखने की प्रक्रिया को पर्याप्त रूप से प्रभावित करता है।मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी छात्रों को पहले सरल विषय-वस्तु पढायी जाये, बाद में कठिन। ऐसा करने से छात्र कठिन विषय-वस्तु को भी आसानी से सीख सकेगा। छात्रों के समक्ष विषय-वस्तु को प्रस्तुत करते समय "सरल से कठिन की ओर" शिक्षण सूत्र का भी अनुसरण करना चाहिए।
  • उदाहरण प्रस्तुतीकरण- प्रत्येक शिक्षण विषय में दो संप्रत्यय होते हैं स्थुल व सूक्ष्म। छात्र स्थुल प्रत्ययों को आसानी से समझ लेता है जबकि सूक्ष्म प्रत्ययों को समझने में उसे कठिनाई होती है। अत: शिक्षक को दैनिक जीवन से सम्बन्धित तथा विसंगत उदाहरण चुनकर विषय-वस्तु का स्पष्टीकरण करना चाहिए। शिक्षक को विषय-वस्तु की गहराई को समझने हेतु 'विशिष्ट से सामान्य की ओर' तथा "उदाहरण से नियम की ओर' शिक्षण सूत्रों का प्रयोग करना चाहिए।
  • रुचिकर विषय-वस्तु - यदि विषय-वस्तु रुचिकर है तो छात्र ध्यान लगाकर पढ़ते है। यदि विषय-वस्तु रुचिकर नहीं है तो छात्र ध्यान केन्दित नहीं कर पाते और शीघ्र ही ऊब जाते है या थकान का अनुभव करते हैं। अतः  अध्यापक को कक्षा में शिक्षण करवाने से पूर्व छात्रों में अध्यापन विषय के अति गहन रुचि उत्पन्न करनी चाहिए तथा अपनी शिक्षण कला के माध्यम से विषयवस्तु को रोचक बनाकर छात्रों के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। इससे छात्र सीखने के लिए प्रेरित हो जाते है।
  • विषय-वस्तु की उद्देश्यपूर्णता- उद्देश्यपूर्ण विषय-वस्तु भी छात्रों की अधिगम प्रक्रिया को पुष्ट बनाती है। यदि विषय-वस्तु उद्देश्यपूर्ण है तथा छात्रों की आवश्यकतओं की सन्तुष्टि करती है तो छात्र उसे सरलता से सीख लेते हैं। अतः शिक्षक को विषय-वस्तु को पढाने ने पूर्व छात्रों के समक्ष उसके उद्देश्य व उपयोगिता को स्पष्ट कर देना चाहिए। छात्र जिस विषय-वस्तु को अपने दैनिक जीवन से जोड़ पाते है उसे जल्दी सिख जाते है और  छात्र ध्यान लगाकर पढ़ते है। पढ़ने के बाद में भी उस विषय में जानकारी प्राप्त करना चाहते है।

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